लोकायुक्त संस्था - एक परिचय

 

लोकायुक्त संस्था का सृजन जन साधारण को स्वच्छ प्रशासन प्रदान करने के उद्देश्य से लोक सेवकों के विरूद्ध भ्रष्टाचार एवं पद के दुरूपयोग सम्बन्धी शिकायतों पर स्वतंत्र एवं निष्पक्ष रूप से जॉंच एवं अन्वेषण करने हेतु राजस्थान लोकायुक्त तथा उप-लोकायुक्त अधिनियम, 1973 के अन्तर्गत हुआ।

लोकायुक्त एक स्वतंत्र संस्थान है जिसका क्षेत्राधिकार सम्पूर्ण राजस्थान राज्य है। यह राज्य सरकार का कोई विभाग नहीं है और न ही इसके कार्य में सरकार का कोई हस्तक्षेप है।

वर्तमान में न्यायमूर्ति श्री एस.एस. कोठारी राजस्थान राज्य के लोकायुक्त के पद पर पदासीन हैं।

 

कार्य

 सार्वजनिक क्षेत्र में भ्रष्टाचारए पदीय दुरूपयोग एवं अकर्मण्यता से सम्बन्धित परिवादों पर स्वतंत्र एवं निष्पक्ष अन्वेषणों के माध्यम से पीड़ित की व्यथा का निराकरण एवं आरोपी के विरूद्ध कार्यवाही की अनुशंसा करना ।
हैं।

  • अन्वेषणों में तत्परता एवं निष्पक्षता को बनाये रखना ।
  • अधिकार क्षेत्र में आने वाले संगठनोंध्विभागों में जवाबदेही सुनिश्चित करना।
  • अपने कार्य के निष्पादन में निपुणता को बनाये रखना ।
  • जन जन की समस्याओं से स्वयं को सम्बद्ध रख लक्ष्य के प्रति समर्पित रहना ।

वस्तुस्थिति

आज भारत की गिनती भले ही बहुत तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था के तौर पर होती हो लेकिन भ्रष्टाचार के मुद्दे पर हमें शर्मिन्दगी ही महसूस करनी पड़ती है। इसने हमारी उपलब्धियों को सीमित कर दिया है। राष्ट्रहित व जनहित के कार्यों में लगाई जाने वाली बहुत बड़ी राशि भ्रष्टाचारियों द्वारा हड़प ली जाती है। यह अक्षम्य अपराध है। भ्रष्ट अधिकारियों ने प्रगति की राह रोकी है और जनता का भरोसा तोड़ा है। 

प्रतिबद्धता

 लोकायुक्त शिकायत या स्वप्रेरणा के आधार पर प्रारम्भ की गई जॉंच एवं अन्वेषणों के माध्यम से लोक प्रशासन में स्वच्छताए निष्पक्षता एवं संवेदनशीलता लाने हेतु सतत प्रयासरत है । यह लोक सेवा में समर्पणए वचनबद्धताए जवाबदेहीए पारदर्शिता एवं उच्च गुणवत्ता प्रदान करवाने हेतु प्रतिबद्ध है । 

संकल्प

लोकसेवकों में व्याप्त भ्रष्टाचार, कदाचरण, पद के दुरूपयोग एवं अकर्मण्यता को समाप्त करने के लक्ष्य की पूर्ति हेतु लोकायुक्त सचिवालय कृतसंकल्पित है।

प्रयास

यह सुनिश्चित किया जायेगा कि प्राप्त शिकायतों की शीघ्र, सत्यनिष्ठ, निष्पक्ष एवं न्यायपरक जांच होकर भ्रष्ट आचरण उजागर हो। शासकीय निर्णयों एवं प्रक्रियाओं में भ्रष्टाचार पर अंकुश लगकर शुचिता का विकास हो और स्वच्छ शासन को पोषण व सम्बल मिले।

अपेक्षा

वर्ष 1973 में बनाये गये इस लोकायुक्त अधिनियम में समय की मांग एवं जनता की आकांक्षाओं के अनुरूप प्रभावी संशोधनों की आवश्यकता है। इस हेतु राज्य सरकार द्वारा दिनांक 28.2.2014 को मौजूदा लोकायुक्त अधिनियम के प्रावधानों को संशोधित कर अधिनियम को सशक्त व प्रभावी बनाने के लिए महाधिवक्ता श्री नरपत मल लोढ़ा की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय कमेटी का गठन किया गया है जो सभी पक्षों से विचार कर एवं सभी पहलुओं पर चर्चा कर इस कानून की परिधि को व्यापक बनाते हुए एक वर्ष की समयावधि में अपनी रिपोर्ट राज्य सरकार को प्रस्तुत करेगी और राज्य सरकार तद्नुरूप आवश्यक विधिक कार्यवाही करेगी।

आग्रह

यदि कोई लोकसेवक तय सीमा में काम नहीं करता है या किसी काम को करने की एवज में आपसे कोई अपेक्षा करता है या रिश्वत की मांग करता है या अकर्मण्यता बरतता है तो आपसे अनुरोध है कि ऐसी शिकायतें हमारे प्रकाश में लाने का माध्यम बनें।